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धारा 63 BSA प्रमाणपत्र (certificate) की व्याख्या

अंतिम समीक्षा: 8 अक्टूबर 2026

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, BSA) की धारा 63 चैट एक्सपोर्ट और ईमेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सबूत के रूप में पेश करने देती है, बशर्ते शर्तें पूरी हों। इनमें अनुसूची के प्रारूप में एक प्रमाणपत्र शामिल है, जिस पर दो भागों में हस्ताक्षर होते हैं: भाग A रिकॉर्ड का प्रभारी व्यक्ति और भाग B एक विशेषज्ञ, और हर रिकॉर्ड का हैश वैल्यू (hash value) दिया जाता है।

धारा 63 क्या है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह ली और 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ। धारा 63 इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बारे में है। यह पुराने अधिनियम की धारा 65B की उत्तराधिकारी है। मोटे तौर पर यह कहती है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी, जैसे चैट एक्सपोर्ट, ऑडियो फ़ाइल, ईमेल या प्रिंटआउट, को दस्तावेज़ माना जा सकता है और मूल डिवाइस पेश किए बिना सबूत के रूप में दिया जा सकता है, बशर्ते धारा की शर्तें पूरी हों। उन शर्तों में से एक धारा 63(4) का प्रमाणपत्र है।

प्रमाणपत्र: रूपरेखा

धारा 63(4) अधिनियम की अनुसूची (Schedule) में दिए गए प्रारूप में प्रमाणपत्र माँगती है। अनुसूची के प्रारूप के दो भाग हैं। यह गाइड बताती है कि इन भागों का क्या काम है; यह प्रारूप को ज्यों-का-त्यों नहीं देती। मौजूदा पाठ आधिकारिक अधिनियम से लें।

भागकौन पूरा करता हैक्या शामिल है
भाग Aडिवाइस या अकाउंट का प्रभारी व्यक्ति, आमतौर पर रिकॉर्ड पेश करने वाला पक्षरिकॉर्ड किस डिवाइस या अकाउंट से आया, कैसे बना, और हर रिकॉर्ड का हैश वैल्यू
भाग Bएक विशेषज्ञविशेषज्ञ का प्रमाणन, जिसमें रिकॉर्ड का हैश वैल्यू भी शामिल है

दोनों भागों पर हस्ताक्षर होते हैं। फिर प्रमाणपत्र को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के साथ पेश किया जाता है।

भाग B के लिए विशेषज्ञ कौन हो सकता है

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 22 मई 2026 को तय किए गए Pune Bar Association v Union of India की खबरों के अनुसार, न्यायालय ने धारा 63(4) को वैध ठहराया, हैश वैल्यू को इलेक्ट्रॉनिक फ़िंगरप्रिंट बताया, और कहा कि भाग B पर हस्ताक्षर करने वाले विशेषज्ञ का सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79A के तहत अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य परीक्षक (Examiner of Electronic Evidence) होना ज़रूरी नहीं है, यदि उस व्यक्ति को कंप्यूटर विज्ञान या साइबर फ़ोरेंसिक में विशेष कौशल हो और अदालत उससे संतुष्ट हो। इस पर भरोसा करने से पहले निर्णय स्वयं पढ़ें। अलग-अलग अदालतों और मंचों में व्यवहार भिन्न हो सकता है।

हैश वैल्यू (hash value) क्या है

हैश वैल्यू (या डाइजेस्ट) किसी फ़ाइल के ठीक-ठीक बाइट्स से एल्गोरिदम द्वारा निकाली गई एक छोटी स्ट्रिंग है। एक ही फ़ाइल का हैश हमेशा वही आता है; कोई भी बदलाव, यहाँ तक कि दोबारा सेव करना, कंप्रेस करना या किसी ऐप से फ़ॉरवर्ड करना, अलग हैश दे देता है। SHA-256 हैश 64 हेक्साडेसिमल अक्षरों का होता है। अनुसूची मानक एल्गोरिदम का ज़िक्र करती है; SHA-256 उनमें व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला एक है। हैश यह नहीं दिखाता कि फ़ाइल किसने बनाई या उसकी सामग्री सच है। वह केवल यह दिखाता है कि हैश निकाले जाने के बाद से फ़ाइल बदली नहीं है।

चरण

  1. इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की पहचान करें। हर उस फ़ाइल की सूची बनाएँ जिस पर आप भरोसा करेंगे: चैट एक्सपोर्ट, ऑडियो, स्क्रीनशॉट, ईमेल, और यह भी कि वह किस डिवाइस या अकाउंट से आई।
  2. हर मूल फ़ाइल का हैश वैल्यू निकालें। मूल, बिना छुई फ़ाइल पर SHA-256 जैसा मानक एल्गोरिदम इस्तेमाल करें और मान को ठीक-ठीक लिख लें।
  3. भाग A पूरा करें। जिस डिवाइस या अकाउंट में रिकॉर्ड है, उसका प्रभारी व्यक्ति अनुसूची (Schedule) में दिए प्रारूप के अनुसार प्रमाणपत्र का भाग A पूरा करता है, जिसमें डिवाइस का ब्योरा और हैश वैल्यू होते हैं, और हस्ताक्षर करता है।
  4. भाग B किसी विशेषज्ञ से पूरा कराएँ। अपेक्षित विशेषज्ञता वाला व्यक्ति भाग B पूरा करके हस्ताक्षर करता है। जब तक आप स्वयं वह विशेषज्ञ न हों, यह भाग खुद न भरें और न उस पर हस्ताक्षर करें।
  5. रिकॉर्ड के साथ दाखिल करें। प्रमाणपत्र को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और मूल फ़ाइलों के साथ पेश करें, और समय तथा प्रारूप के बारे में अदालत या आयोग के निर्देशों का पालन करें।

आम गलतियाँ

अन्य देश

यह गाइड भारत के बारे में है। अमेरिका में 28 U.S.C. 1746 के तहत घोषणाएँ और Federal Rules of Evidence 902(13) तथा 902(14) चलते हैं; इंग्लैंड और वेल्स, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के अपने नियम हैं।

स्रोत (Sources)

  1. India Code: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (धारा 63 और अनुसूची)
  2. विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय: संसद के अधिनियम
  3. भारत का राजपत्र (The Gazette of India): भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (2023 का अधिनियम 47) और प्रवर्तन अधिसूचना
  4. LiveLaw: सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 63(4) BSA को दी गई चुनौती खारिज की (रिपोर्ट, 22 मई 2026)
  5. SCC Online: Pune Bar Association v Union of India, 2026 SCC OnLine SC 1297 (रिपोर्ट)